यादों की धूल

गुज़ारिश है ये दिल की
ऐ वक्त –
तू थोड़ा ठहर जा,
थोड़ा धीमे चल
कदम तू आगे न बढ़ा ~
जो तू कल था मेरा
न भूल पाऊँगी
जो तू गुज़र गया है
न दोबारा जी पाऊँगी
रेत की तरह तू हाथ से फिसला ~
अभी तो मुट्ठी बंद थी
कण कण तेरा गुज़र गया है
लेकिन बंद मुट्ठी में
अब भी यादों की धूल समाई है|

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